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बरेली की सीट तय करती है यूपी की तकदीर,जाने जनता किन मुद्दों पर करेगी वोट

- January 31, 2022

बरेली की सीट तय करती है यूपी की तकदीर,जाने जनता किन मुद्दों पर करेगी वोट

रिपोर्ट-सोनू अंसारी

यूपी की सियासत में इन दिनों हलचल दिखाई दे रही है बरेली में दूसरे चरण में मतदान होना है ऐसे में क्षेत्र की जनता के मन में सवाल मन को क्रोध रहे हैं 122 विधानसभा की जो एक लंबे समय से सुरक्षित सीट है इस सीट पर कई दिग्गज प्रत्याशी मैदान में है तो हर मतदाता की जुबां पर सिर्फ एक ही नारा सुनाई दे रहा है वह नारा है इस बार विकास के नाम पर लगाएंगे मोहर

विधानसभा चुनाव में जब ANN की टीम ने लोग से बात की

विधानसभा चुनाव में जब ANN की टीम ने लोग से बात की इस बार कैसे नेता को पसंद करेंगे तो जनता के मन में सिर्फ एक ही सवाल सुनाई दे रहा था वह सवाल था विकास शिक्षा और स्वास्थ तीनो ही मुद्दों को लेकर जब संवाददाता ने गहराई से लोगों से पूछा तो लोगों के साथ तौर पर यह तीन लव्स सुनाई दे रहे थे दरसल उत्तर प्रदेश के बरेली की सुरक्षित विधानसभा फरीदपुर के मतदाता हर बार अपना विधायक बदल देते हैं. यहां वर्ष 1957 से विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. मगर यहां की जनता ने किसी भी विधायक को लगातार दो बार नहीं चुना. दो दशक से यहां के मतदाता जिस विधायक को चुनते हैं. उसकी ही यूपी में सरकार बनती है.

निर्वाचन आयोग ने बरेली की फरीदपुर विधानसभा को 1957 के चुनाव में मान्यता दी

निर्वाचन आयोग ने बरेली की फरीदपुर विधानसभा को 1957 के चुनाव में मान्यता दी थी. इससे पहले फरीदपुर आंवला विधानसभा में शामिल था. पहली बार फरीदपुर सुरक्षित सीट से कांग्रेस के नत्थू लाल ने अपनी जीत दर्ज की. 1962 में जनता ने उनको बदल दिया. यहां से 1962 में जेएस पार्टी के हेमराज सिंह ने जीत दर्ज की.फिर यह सीट सामान्य हो गई.

1967 के चुनाव में जनता ने हेमराज को हराकर कांग्रेस के डीपी सिंह को विधायक बनाया

1967 के चुनाव में जनता ने हेमराज को हराकर कांग्रेस के डीपी सिंह को विधायक बनाया. 1969 में उपचुनाव हुआ. इस चुनाव में कांग्रेस को हार मिली. फरीदपुर से बीकेडी के राजेश्वर सिंह विधायक बन गए. 1974 में फिर यह सीट सुरक्षित हो गई. सुरक्षित सीट से बीकेडी से हेमराज ने जीत दर्ज की. मगर 1980 में जनता ने हेमराज को हरा दिया.इस चुनाव में जेएनपी के सियाराम सागर को पहली बार जीत दिलाई.1980 के चुनाव में जनता ने उन्हें हरा दिया. यहां से भाजपा के नंदराम ने पहली बार जीत दर्ज की. 1985 में एक बार फिर कांग्रेस ने सीट जीत ली. यहां से नत्थू लाल विधायक बने. 1989 में जनता ने नत्थू लाल को हराकर सियाराम सागर को निर्दलीय चुनाव जिताया. मगर 1991 के उपचुनाव में नंदराम भाजपा से विधायक बने. 1993 में फिर सियाराम सागर सपा के टिकट पर विधायक बन गए.

इस सीट पर बड़े राजनीति लोगों की नजर रहती है चाहे वह सूबे समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश हूं या फिर उनके पिता मुलायम सिंह या फिर मायावती हूं या फिर मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन सभी बड़े नेताओं की नजर इस सीट पर जिताने की रहती है वह अपने प्रत्याशी को हर संभव जिताने का गठजोड़ करते हैं लेकिन एक लंबे समय से क्षेत्र में विकास तो हुआ लेकिन गुना काफी रहा उद्योग धंधे तो लगे लिखित क्षेत्र के लोगों को रोजगार नहीं मिला लखनऊ से ढाई सौ किलोमीटर और दिल्ली से ढाई 100 किलोमीटर की दूरी पर बसा बरेली शहर के पास का ये वो इलाका है जहां पर अंग्रेजों ने भी अपना ठिकाना बनाया था और इसी फरीदपुर की सरजमी से डाकबंगला चलाया करते थे लेकिन यह विकास शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में आज भी पिछड़ा हुआ है यहां की लोग आज भी रोजगार को तरसते हैं साथ ही साथ अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए तड़पते हैं इन दोनों ही मुद्दों में के मामले में सभी नेता फेल होते रहे लेकिन एक बार फिर नेता इन्हीं मुद्दों का सामना कर रहे हैं