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रुड़की: सरकारी सिस्टम को सुधारने के लिए खुद मैदान में आए सीएम, पूर्ति निरीक्षक पर भी धामी सरकार का चलेगा चाबुक?

- May 19, 2022

रुड़की:- सरकारी सिस्टम को सुधारने के लिए खुद मैदान में आए सीएम, पूर्ति निरीक्षक पर भी धामी सरकार का चलेगा चाबुक?

रिपोर्ट: सलमान मालिक

रुड़की: सरकारी सिस्टम को सुधारने के लिए सीएम को खुद मैदान में उतरना पड़ रहा है, लेकिन कुछ सरकारी दामाद इससे भी सबक नही ले रहे है। दफ्तरों से नदारत रहना मानों इनका पेशा बन चुका है, इनको आमजन की सेवा सुरक्षा से कोई सरोकार नही, सरकार की रोटियों पर पलने वाले कुछ सरकारी नौकरों की आदत इतनी खराब हो चुकी है कि वह चाहकर भी सिस्टम में सेट नही बैठ पाते, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है। कुछ ऐसा ही नजारा रुड़की खाद्य पूर्ति कार्यालय में दिखाई पड़ता है।

पूर्ति निरीक्षक दिनेश शर्मा अक्सर कुर्सी से नदारत मिलते है

कार्यालय में तैनात नारसन ब्लॉक के पूर्ति निरीक्षक दिनेश शर्मा अक्सर कुर्सी से नदारत मिलते है, दूर दराज से आने वाले फरियादी (ग्रामीण) कई-कई घण्टे इंतेज़ार के बाद बैरंग वापस लौटते है, बिडम्बना ये है कि शिकायत के बाद भी इन साहब पर कोई फर्क नही पड़ता, अधिकारियों के आदेश ये जूते की नोक पर रखते है तभी उच्चाधिकारियों के कहने के बावजूद सरकारी बाबू अपनी कार्यशैली में बदलाव नही ला पा रहे है, पूर्ति निरीक्षक का ये कारनामा जगजाहिर है और पूरे डिपार्टमेंट में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

 

खाद्य पूर्ति निरीक्षक रुड़की कार्यालय में बैठकर क्षेत्रीय लोगों की समस्याओं का समाधान करते है

आपको बता दे अलग-अलग क्षेत्रो की खाद्य पूर्ति निरीक्षक रुड़की कार्यालय में बैठकर क्षेत्रीय लोगों की समस्याओं का समाधान करते है। इन्ही पूर्ति निरीक्षकों में एक निरीक्षक जिनपर नारसन ब्लॉक की जिम्मेदारी है, पूरे विभाग पर सवालियां निशान लगा रहे है। जी हां नारसन ब्लॉक के खाद्य पूर्ति निरीक्षक दिनेश शर्मा की कुर्सी अक्सर खाली देखी जाती है, ग्रामीण दूर-दराज से अपनी फरियाद लेकर कार्यालय पहुँचते है लेकिन साहब नदारत मिलते है, घण्टों-घण्टों इंतेज़ार के बाद लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है,

अन्य कर्मियों को भी दिनेश शर्मा की खबर नही रहती

बिडम्बना ये की कार्यालय में तैनात अन्य कर्मियों को भी दिनेश शर्मा की खबर नही रहती, ग्रामीणों का आरोप ये भी है कि जब उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जाता है तो या तो उनका फोन बंद मिलता है और अगर खुला हो तो वह नही उठाते, क्षेत्रीय लोगो ने उच्चाधिकारियों से भी शिकायत की, बाकायदा तहसील दिवस में भी अधिकारियों ने पूर्ति निरीक्षक को नसीहत बख्शी लेकिन साहब अपनी कार्यशैली बदलने को तैयार नही है। सूत्र तो यहां तक बताते है कि दफ्तर के अन्य कर्मी भी इनकी कार्यशैली से तंग आचुके है, लोगो को जवाब देते देते वो थक चुके है लेकिन साहब पर कोई फर्क नही पड़ता। ग्रामीणों के मुताबिक़ गाँव के राशन डीलर अपनी मनमानी कर रहे है और अगर वो शिकायत करने दफ्तर आते है तो उन्हें महोदय नदारत मिलते है। इस मामले में हरिद्वार डीएसओ का कहना है कि यदि पूर्ति निरीक्षक ऐसा कर रहे है तो इसकी जांच कराई जाएगी, काम के प्रति लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नही होगी।