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कला एवं संस्कृति प्रभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ,ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन

- March 31, 2024
कला एवं संस्कृति प्रभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ,ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन

कला एवं संस्कृति प्रभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ,ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन

रिपोर्ट: जगजीत सिंह

– कला एवं संस्कृति सामाजिक एकता का सूत्र – संदीप मारवाह
– कला एवं संस्कृति प्रभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ
– ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन

30 मार्च 2024, गुरुग्राम: श्रेष्ठ भावनाएं एवं विचारधारा मानवीय सभ्यता का आधार हैं। कला एवं संस्कृति के माध्यम से हम लोगों से जुड़ते हैं। ये सामाजिक एकता का सूत्र है। उक्त विचार एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन तथा नोएडा फिल्म सिटी के संस्थापक-अध्यक्ष संदीप मारवाह ने व्यक्त किए। ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ये बात कही। कला एवं संस्कृति प्रभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए उन्होंने कहा कि कला एवं संस्कृति में प्रेम, शांति और सद्भावना के भाव जरूरी हैं। आध्यात्मिक सशक्तिकरण से ही ये सम्भव हो सकता है।

– भारतीय संस्कृति के पुनरूत्थान में ब्रह्माकुमारीज का शत प्रतिशत योगदान

संदीप मारवाह ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्था भारतीय संस्कृति के पुनरूत्थान में शत प्रतिशत योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज के साथ मिलकर कला एवं संस्कृति को हम एक आदर्श स्वरूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। ब्रह्माकुमारीज के आज का विचार कैलेंडर से अगर हम 365 दिन हर विचार जीवन में अपना लें तो जीवन सार्थक हो जायेगा।

– संस्था के कला एवं संस्कृति प्रभाग की अध्यक्ष राजयोगिनी बीके चंद्रिका दीदी ने कहा कि श्रेष्ठ संस्कारों से ही श्रेष्ठ संस्कृति का निर्माण होता है। एक समय भारतीय संस्कृति अपने दिव्यता के चरम पर थी। ब्रह्माकुमारीज संस्था उन्हीं मूल्यों की स्थापना का कार्य कर रही है। कला एवं संस्कृति समाज की दिशा और दशा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

– ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि कला एवं संस्कृति में बच्चों की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है। उनके जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों के आधार पर कला एवं संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी सुसंस्कृत हो जायेगी। उन्होंने कहा कि कला में हमारी दिव्य संस्कृति की झलक दिखनी चाहिए। भारत संस्कृति देवी देवताओं की संस्कृति है। हमें उस संस्कृति का पुनरूत्थान करना है।

– कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति प्रभाग के उपाध्यक्ष बीके दयाल, प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके पूनम एवं संस्था के मुख्यालय माउंट आबू संयोजक बीके सतीश ने भी प्रति अपनी शुभ कामनाएं व्यक्त की। बीके इंद्रा ने राजयोग के अभ्यास से शांति की गहन अनुभूति कराई। बीके रचना ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में देशभर से संस्था के 250 से भी अधिक सदस्यों ने शिरकत की।