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SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में धूमधाम से मनाया गया 75वाँ गणतंत्र दिवस

- January 26, 2024
SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में धूमधाम से मनाया गया 75वाँ गणतंत्र दिवस

SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में धूमधाम से मनाया गया 75वाँ गणतंत्र दिवस

Report: Jagjeet Singh

26 जनवरी को हर वर्ष हमारे देश में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। इस दिन अंग्रेजों के कानूनों को हटा कर हमने खुद के संविधान को अपनाया था, संसद से भारतीय संविधान लागू होने के बाद भारत एक लोकतान्त्रिक गणराज्य बन गया, यही कारण है कि इस दिन को हम सभी राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में मनाते हैं।

इसी शुभावसर पर आज दिनाँक 26 जनवरी 2024 को SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट देहरादून में देश के 75वें गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास व उत्साहपूर्वक मनाया गया श्री मिथिलेश सिंह, उपसेनानायक SDRF द्वारा सर्वप्रथम राष्ट्रीय ध्वज को फहराया गया, इस दौरान सलामी गार्द द्वारा सलामी की कार्यवाही की गई व प्रांगण में मौजूद समस्त अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा राष्ट्र ध्वज के सम्मान में सेल्यूट किया गया।

तत्पश्चात उपसेनानायक महोदय द्वारा उपस्थित समस्त अधिकारी/कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता व अखंडता की शपथ दिलाई गई। महोदय द्वारा समस्त अधिकारी/कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया गया कि आज का दिन हर भारतवासी के लिए गौरवान्वित करने वाला है। गणतंत्र दिवस का उत्सव भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करने और लोकतंत्र, समानता और न्याय के आदर्शों के प्रति देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का एक तरीका है। यह भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का जश्न मनाने और राष्ट्रीय एकता और एकीकरण को बढ़ावा देने का अवसर भी है। अनेकता में एकता वाले हमारे देश पर हमे गर्व करना चाहिए और ये प्रण भी लेना चाहिए कि राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित कराने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर स्वयं को आत्मसमर्पित करेंगे।

उक्त अवसर पर शिविरपाल श्री राजीव रावत, निरीक्षक श्री प्रमोद रावत, सूबेदार मेजर श्री जयपाल राणा, उप-निरीक्षक श्री विजय रयाल, श्री नवीन कुमार इत्यादि भी उपस्थित रहे ध्वजारोहण कार्यक्रम के उपरांत वाहिनी मुख्यालय में उपसेनानायक महोदय के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया जिसके माध्यम से वाहिनी में छायादार व फलदार वृक्षों का रोपण किया गया।