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हाई कोर्ट का फैसला हिंदू और मुस्लिम की शादी मुस्लिम लॉ के तहत लीगल नहीं

- May 31, 2024
हाई कोर्ट का फैसला हिंदू और मुस्लिम की शादी मुस्लिम लॉ के तहत लीगल नहीं

हाई कोर्ट का फैसला हिंदू और मुस्लिम की शादी मुस्लिम लॉ के तहत लीगल नहीं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बीते दिन एक अहम केस में फैसले सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक मुस्लिम पुरुष और एक हिंदू महिला के बीच विवाह वैध नहीं था। अदालत ने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत अंतरधार्मिक विवाह को पंजीकृत करने के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी है । बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा कि एक मुस्लिम पुरुष और एक हिंदू महिला के बीच विवाह को मुस्लिम कानून के तहत “अनियमित” विवाह माना जाएगा, भले ही वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाहित हों। बता दे हिन्दू महिला और मुस्लिम पुरुष ने कोर्ट में याचिका दायर की थी और याचिका में उन्होंने अपने अंतर धार्मिक विवाह के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी , क्यूंकि महिला के परिवार ने विवाह का विरोध किया था जिसके बाद परिवार ने यह भी दावा किया की महिला ने घर से आभूषण लेकर मुस्लिम साथी के साथ शादी करने के लिए घर छोड़ा था.
वहीं वकील के मुताबिक, कपल विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी करना चाहता था लेकिन महिला शादी के लिए दूसरा धर्म नहीं अपनाना चाहती थी। दूसरी ओर, वह व्यक्ति भी अपना धर्म नहीं बदलना चाहता था, बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि जोड़े को विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी को पंजीकृत कराने के लिए विवाह अधिकारी के सामने पेश होने पर पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए। वकील ने तर्क दिया कि अंतर-धार्मिक विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत वैध होगा और मुस्लिम पर्सनल लॉ को दरकिनार कर देगा.जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत ये शादी लीगल नहीं होगी.