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तापसी पन्नू की फिल्म शाबाश मिट्ठू रिलीज पूर्व भारतीय महिला कप्तान मिथाली राज के जीवन से उठाएगी परदे

- 16 July 2022

तापसी पन्नू की फिल्म शाबाश मिट्ठू रिलीज पूर्व भारतीय महिला कप्तान मिथाली राज के जीवन से उठाएगी परदे

मनोरंजन डेस्क। ANN NEWS

शाबाश मिट्ठू फिल्म के ज़रिए भारतीय क्रिकेट टीम की पूर्व महिला कप्तान मिथाली राज के जीवन को बड़े परदे पर उतारा गया है। “महिला” यह एक ऐसा शब्द है जिसे अगर हम कई साल पहले सुनते थे तो दिमाग में कई अलग-अलग प्रकार की भावनाएं उत्पन्न होती थी जैसे – लाचार, बेबस, बेचारी इत्यादि,लेकिन वहीँ दूसरी ओर अब जब भी हम महिला शब्द सुनते है तो हमारे दिमाग में आता है बुद्धिमान, मजबूत और भी इन जैसे कई शब्द आपको बता दे की आज महिला इतनी बलवान हो गयी है और इतनी महान हो गयी है जिसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते चाहे वो घर का काम हो या फिर खेल का मैदान दोनों ही ओर महिला पुरुषो के मुक़ाबले एक अलग उड़ान भर रही है।

महिला क्रिकेट के आगे बढ़ते हुए जीवन को भी दिखाया

आज जब पूरी दुनिया क्रिकेट की दीवानी है जहां गली का बच्चा – बच्चा भी बल्लेबाज़ी को जानता है तो ऐसे में भारत के क्रिकेट टीम की पूर्व महिला कप्तान मिथाली राज को कौन नहीं जानता होगा। जिन्होंने महिला इंटरनेशनल टीम में सबसे ज्यादा रन बनाये थे वो एक ऐसी शख्सियत है जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी को एक बड़े परदे पर उतार दिया। आपको बता दे के मिथाली राज की ज़िन्दगी के ऊपर एक ऐसी फिल्म बनी है जो सिर्फ मिथाली राज की ज़िन्दगी ही नहीं बल्कि उसमे महिला क्रिकेट के आगे बढ़ते हुए जीवन को भी दिखाया है।

जानिए कैसी है ये फिल्म

फिल्म क्रिकेट को ग्लैमराइज नहीं करती बल्कि महिला क्रिकेट की हकीकत को दिखाती है मिथाली की कहानी के साथ साथ किस तरह से महिला क्रिकेट आगे बढ़ा क्या क्या चुनातिया आई यह सब कुछ इस फिल्म में दर्शाया गया है। यहां आपको सिर्फ चौके छक्के लगाती तापसी ही नहीं दिखेंगी। बल्कि मिथाली के किरदार में उनके कई रूप भी दिखेंगे जो आपको सोचने पर भी मजबूर करेंगे कि इंडियन क्रिकेट टीम की कप्तान के साथ ऐसा हुआ था ये तापसी की बेहतरीन परफॉरर्मेंस में से एक मानी जाएगी। यह फिल्म महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिथाली राज की जिंदगी के प्रेरणादायी सफर को दिखाती ये फिल्म देखी जानी चाहिए।

भारी-भरकम डायलॉगबाजी के पूरी ईमानदारी से मिताली को पर्दे पर उतारा

लेकिन इस फिल्म की एक बड़ी कमजोर कड़ी है उसकी धीमी रफ्तार। कई सीन बेवजह खींचे हुए लगते हैं। खासकर इंटरवल के बाद मिथाली के हार मानकर लौटने के बाद का घटनाक्रम ऊब पैदा करता है। उस पर अमित त्रिवेदी के गाने भी फिजूल में फिल्म की लंबाई बढ़ाने का काम करते हैं। फिल्म को कम से कम 20 मिनट कसा जाना चाहिए था। आखिर में विश्व कप क्रिकेट के दौरान भी मिताली का योगदान सही ढंग से हाईलाइट नहीं हो पाता। लेकिन अदाकारी की बात करें, तो तापसी की मेहनत रंग लाई है। उन्होंने बिना भारी-भरकम डायलॉगबाजी के पूरी ईमानदारी से मिताली को पर्दे पर उतारा है।