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भारत रंग महोत्सव के रजत जयंती समारोह की शुरुआत, विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया

- 4 February 2024
भारत रंग महोत्सव के रजत जयंती समारोह की शुरुआत, विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया

भारत रंग महोत्सव के रजत जयंती समारोह की शुरुआत, विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया

नई दिल्ली: भारत रंग महोत्सव के रजत जयंती समारोह की शुरुआत हो चुकी है। मुंबई में 1 फ़रवरी को शुभारंभ के बाद राजधानी दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में 4 फ़रवरी को विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया गया। इतिहास की दृष्टि से विक्रमादित्य विक्रम संवत की शुरुआत करने के लिए याद किए जाते हैं उन्होंने 57 ई.पू. में शकों को हराने के बाद की थी। उन्होंने उत्तर भारत पर अपना शासन व्यवस्थित किया था। उनके पराक्रम को देखकर ही उन्हें महान सम्राट कहा गया। विक्रमादित्य नाटक के लेखक हैं दिनेश नायर और निर्देशक टीकम जोशी हैं।

नाटक की विषयवस्तु वर्तमान सामाजिक परिदृश्‍य में इतिहास को देखने की एक नई दृष्टि पैदा करती है। लोक कथाएँ हमेशा से हमारे पुरातन समाज में लोक व्‍यवहार, सामाजिक मर्यादाएँ, नैतिक मूल्य को समझने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया रही हैं। इतिहास को देखने और समझने में जो आदर्श समाज की परिकल्पना हमारे मस्तिष्क में उभरती है, उसमें विक्रमादित्य से लेकर राजा भोज का समय एक आदर्श स्थापित करता है। किसी भी समाज में आदर्श नायक अपने मूल्यों में हमेशा से तटस्थ रहा है और इन तटस्थ मूल्यों की व्याख्या राजा विक्रमादित्य के समय में महत्वपूर्ण ढंग से परिलक्षित होती है। मूलतः ये कथाएँ हमारे समाजिक जीवन में क़ि‍स्सों और कहानियों की शक्ल में हस्तांतरित होती रहीं और जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि इनमें आधुनिक समाज के जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता खोजी जाए। नाटक की रचना प्रक्रिया को शैलीबद्ध न करते हुए इस समय-काल में नाटक की रचना प्रक्रिया में आधुनिक अभिनेताओं के साथ एक प्रायोगिक दृष्टिकोण रखा गया है। नाटक समय-काल में एक साथ अपनी यात्रा करता है।

इसके अलावा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा महाविद्यालय की छात्राओं ने बाल यौन शौषण के बारे में जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक श्री चितरंजन त्रिपाठी ने कहा कि हम ‘ वसुधैव कुटुंबकम्’ वंदे- भारंगम के द्वारा भाईचारे की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं, हम विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं,और आपसी जुड़ाव को महसूस कर रहे हैं। भारंगम के माध्यम से हम अपने देश और अन्य देशों की संस्कृति को जान रहे हैं उन्होंने सभी रंगकर्मियों को उनके कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया।

इस 21-दिवसीय रंग महोत्सव का उद्घाटन महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम रमेश बैस और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष परेश रावल ने की. यह कार्यक्रम 1 फ़रवरी से 21 फ़रवरी , 2024 तक देश के 15 शहरों में आयोजित किया जाएगा जिसमें 150 से अधिक प्रस्तुतियां, कार्यशालाएं, चर्चाएं और मास्टरक्लास शामिल होंगे । इस वर्ष भारत रंग महोत्सव की 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पूर्व स्नातक पंकज त्रिपाठी को समारोह का रंगदूत बनाया गया है.

वसुधैव कुटुंबकम्-वंदे भारंगम्

इस वर्ष भारंगम् की थीम है “वसुधैव कुटुंबकम्-वंदे भारंगम्। इस बार इस थीम के माध्यम से रंगमंच के माध्यम से वैश्विक एकता को बढ़ावा देने, सामाजिक सद्भाव का संदेश जनमानस तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है । रंगमंच कला, विविध संस्कृतियों को एक साथ लाते हुए, एक साझा वैश्विक परिवार की भावना पैदा करने के उद्देश्य पर केंद्रित है.